Jageshwar Dham News : उत्तराखंड की देवभूमि में स्थित विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम अब अपने अनूठे प्रसाद के लिए भी चर्चा में है। यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को अब पारंपरिक प्रसाद के साथ-साथ एक खास अनुभव मिलेगा। जागेश्वर धाम के ‘प्रसादम’ में अब शुद्ध पहाड़ी खोया, तिल और चौलाई से बनी बाल मिठाई, तांबे के सिक्के और धाम से संबंधित जानकारी वाली एक छोटी पुस्तक शामिल की जाएगी। यह पहल न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक अनुभव को समृद्ध करेगी, बल्कि स्थानीय संस्कृति और उत्पादों को भी बढ़ावा देगी।
जागेश्वर धाम में प्रसाद की नई व्यवस्था
जागेश्वर धाम, अल्मोड़ा से लगभग 35 किलोमीटर दूर, हिमालय की गोद में बसा एक प्राचीन तीर्थ स्थल है। यहाँ 250 से अधिक छोटे-बड़े मंदिर हैं, जो भगवान शिव को समर्पित हैं। मान्यता है कि यहाँ स्थित ज्योतिर्लिंग बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। देवदार के घने जंगलों के बीच बसे इस धाम की शांति और प्राकृतिक सौंदर्य श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अब यहाँ का प्रसाद भी इसे और खास बनाने जा रहा है। जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय की पहल पर यह शुरुआत हुई है। चैत्र अष्टमी मेले के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जागेश्वर प्रसादम योजना को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा, “यह योजना न केवल धार्मिक महत्व को बढ़ाएगी, बल्कि स्थानीय उत्पादों और महिला सशक्तिकरण को भी प्रोत्साहन देगी।” इस पहल के तहत जागेश्वर धाम का प्रसाद अब एक नए स्वरूप में श्रद्धालुओं के सामने आएगा।
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प्रसाद में बाल मिठाई: पहाड़ी सरोकार
अल्मोड़ा की प्रसिद्ध मिठाई ‘बाल मिठाई’ अब जागेश्वर धाम के प्रसाद का हिस्सा होगी। यह मिठाई शुद्ध पहाड़ी खोया, तिल और चौलाई जैसे स्थानीय उत्पादों से तैयार की जाएगी। यह न केवल स्वादिष्ट होगी, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध खाद्य संस्कृति को भी प्रदर्शित करेगी। इस पहल के पीछे मकसद स्थानीय किसानों और महिला समूहों को रोजगार देना भी है। अल्मोड़ा के डीएम आलोक कुमार पांडे ने बताया कि जिले के 11 ब्लॉकों की महिला समूहों को प्रसाद बनाने का जिम्मा सौंपा गया है।
तांबे के सिक्के: धाम की पहचान
प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं को तांबे के सिक्के भी दिए जाएंगे। इन सिक्कों पर जागेश्वर धाम की प्रतिमा उकेरी जाएगी, जो इसे एक अनोखी स्मृति चिह्न बनाएगी। यह सिक्का न केवल धार्मिक महत्व रखेगा, बल्कि तांबे की मांग बढ़ने से स्थानीय कारीगरों को भी लाभ होगा। इस पहल से मंदिर की आय में वृद्धि होने की भी उम्मीद है।
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जानकारी पुस्तक: धाम का इतिहास और महत्व
प्रसाद में एक छोटी पुस्तक भी शामिल होगी, जिसमें जागेश्वर धाम का इतिहास, यहाँ के मंदिरों का महत्व और रोचक तथ्य होंगे। यह पुस्तक श्रद्धालुओं को धाम की आध्यात्मिक और ऐतिहासिक यात्रा से जोड़ेगी। इससे न केवल तीर्थयात्रियों का अनुभव गहरा होगा, बल्कि वे इस पवित्र स्थल की कहानी को अपने साथ ले जा सकेंगे।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
इस नई प्रसाद योजना का एक बड़ा उद्देश्य स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। तांबे के सिक्कों और बाल मिठाई के निर्माण से कारीगरों और किसानों को रोजगार मिलेगा। साथ ही, मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से पर्यटन को भी प्रोत्साहन मिलेगा। डीएम आलोक कुमार पांडे ने कहा, “यह योजना अगर सफल रही, तो इसे अल्मोड़ा के अन्य मंदिरों जैसे चितई गोलू देवता मंदिर में भी लागू किया जाएगा।”
श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव
जागेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालु अब यहाँ से केवल आशीर्वाद ही नहीं, बल्कि एक यादगार अनुभव भी लेकर जाएंगे। बाल मिठाई का स्वाद, तांबे का सिक्का और जानकारी पुस्तक इस तीर्थ यात्रा को और भी खास बनाएंगे। यह पहल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ उत्तराखंड की संस्कृति को देश-विदेश तक पहुँचाने में मदद करेगी। जागेश्वर धाम का नया प्रसाद स्वरूप न केवल श्रद्धालुओं के लिए एक अनूठा उपहार है, बल्कि यह स्थानीय समुदाय के लिए आर्थिक अवसर भी लेकर आया है।
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शंकर दत्त पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले चार दशक से मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। Uncut Times के साथ वरिष्ठ सहयोगी के रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड की पत्रकारिता में जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया है। कुमाऊं के इतिहास की अच्छी जानकारी रखते हैं। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक और शोधपरक लेख प्रकाशित। लिखने-पढ़ने और घूमने में रुचि। इनसे SDPandey@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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