देहरादून : उत्तराखंड में त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस कड़ी में राज्य निर्वाचन आयोग, और उत्तराखंड शासन के निर्देशों के अनुपालन में महत्वपूर्ण घोषणा की गई है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए प्रथम चरण 24 जुलाई और द्वितीय चरण 28 जुलाई को संबंधित विकास खंडों में कार्यरत सभी कर्मचारियों, कारीगरों, और मजदूरों के लिए सवेतन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है।
सवेतन अवकाश का दायरा और महत्व
जिलाधिकारी आलोक कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया कि यह सवेतन अवकाश शासकीय, अशासकीय कार्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, अर्ध-सरकारी निकायों, और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत सभी कर्मचारियों, कारीगरों, और मजदूरों पर लागू होगा। इस अवकाश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदान के दिन कोई भी कर्मचारी अपने मताधिकार से वंचित न रहे। यह कदम लोकतंत्र को मजबूत करने और अधिकतम मतदाता भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, जिलाधिकारी ने यह भी घोषणा की कि मतदान की तिथियों पर निर्वाचन क्षेत्रों के सभी कोषागार और उप-कोषागार भी बंद रहेंगे। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और संस्थानों को निर्देश दिए कि इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन किया जाए, और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव: महत्व और प्रक्रिया
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव उत्तराखंड में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, और जिला पंचायत स्तर पर आयोजित किए जाते हैं। यह चुनाव स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने और ग्रामीण विकास को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उत्तराखंड में यह चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के तहत आयोजित किए जा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग और जिला प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जिलाधिकारी ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि वे मतदान के दिन अपने निकटतम मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपने मताधिकार का उपयोग करें और लोकतंत्र को मजबूत करने में योगदान दें।
सवेतन अवकाश का महत्व और प्रभाव
सवेतन अवकाश की घोषणा से यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारी, मजदूर, और कारीगर बिना किसी आर्थिक नुकसान के मतदान में हिस्सा ले सकें। यह कदम विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो निजी क्षेत्र, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, और अर्ध-सरकारी निकायों में कार्यरत हैं, जहां कार्यदिवस पर छुट्टी लेना मुश्किल हो सकता है। इसके अलावा, कोषागार और उप-कोषागारों के बंद रहने से मतदान प्रक्रिया पर प्रशासन का पूरा ध्यान केंद्रित रहेगा। यह व्यवस्था मतदान के दिन किसी भी प्रकार की अव्यवस्था को रोकने में भी मदद करेगी।


मनीषा हिंदी पत्रकारिेता में 20 वर्षों का गहन अनुभव रखती हैं। हिंदी पत्रकारिेता के विभिन्न संस्थानों के लिए काम करने का अनुभव। खेल, इंटरटेनमेंट और सेलीब्रिटी न्यूज पर गहरी पकड़। Uncut Times के साथ सफर आगे बढ़ा रही हैं। इनसे manisha.media@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
Discover more from Uncut Times - ब्रेकिंग न्यूज, फैक्ट चेक, विश्लेषण
Subscribe to get the latest posts sent to your email.