उत्तराखंड में फिर भूकंप के तेज झटकों से डोल उठी धरती

Uttarakhand News : उत्तराखंड के चमोली जिले में शुक्रवार देर रात भूकंप के झटके महसूस किए गए, जिससे स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.3 मापी गई। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकलकर सड़कों पर जमा हो गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के अनुसार, यह भूकंप जमीन की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई पर आया। सौभाग्यवश, इस हादसे में किसी तरह के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है, लेकिन स्थानीय लोग अभी भी सतर्क और चिंतित हैं।

जोशीमठ के पास भूकंप का केंद्र 

इस संबंध में राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) ने भूकंप की पुष्टि करते हुए बताया है कि चमोली जिले में ये भूकंप देर रात 12 बजकर 2 मिनट 44 सेकंड पर महसूस किए गए। एनसीएस के अनुसार भूकंप का केंद्र चमोली जिले में ही से जोशीमठ से 22 किमी दूर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम (WSW) दिशा में Lat: 30.51 N, Long: 79.33 E, पर तथा जमीन की सतह से 10 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है जबकि इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.3 मैग्नीट्यूड आंकी गई है। हालांकि अभी तक किसी भी प्रकार की जन-धन की हानि के अप्रिय समाचार नहीं मिले हैं। एहतियाती तौर पर जिला प्रशासन ने सभी तहसीलों से भूकंप से प्रभावित क्षेत्रों में हुए नुकसान की जानकारी मांगी है।

उत्तराखंड में हाल के भूकंप

यह पहली बार नहीं है जब उत्तराखंड में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इससे पहले, 8 जुलाई 2025 को उत्तरकाशी जिले में 3.2 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। एनसीएस के अनुसार, यह भूकंप दोपहर 1:07 बजे आया और इसकी गहराई 5 किलोमीटर थी। उत्तराखंड का पर्वतीय क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है, जिसके कारण यहां समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस होते रहते हैं।

पहाड़ में भूकंप का खतरा

उत्तराखंड इससे पहले भी वर्ष 1991 में उत्तरकाशी और 1999 में चमोली जैसे भयानक भूकंप झेल चुका है। अगर बात करें तीव्रता की तो वह क्रमशः 7.0 और6.8  थी लेकिन उत्तराखंड में तब से अब तक कोई बड़ा भूकंप नहीं आया, लेकिन धरती के भीतर की हलचलें बता रही हैं कि खतरा अभी टला नहीं है उत्तराखंड में एक बड़े भूकंप की आशंका जताई जा रही है। उत्तराखंड हिमालयी क्षेत्र में स्थित होने के कारण भूकंपीय गतिविधियों के लिए अत्यधिक संवेदनशील है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की आशंका हमेशा बनी रहती है। इसलिए, सरकार और स्थानीय प्रशासन को भूकंप से निपटने के लिए पहले से तैयार रहना होगा। भूकंप-रोधी इमारतों का निर्माण, जागरूकता अभियान, और आपातकालीन प्रबंधन की व्यवस्था को और मजबूत करने की आवश्यकता है।

भूकंप क्यों आता है?

भूकंप का कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की सतह के नीचे सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स हैं, जो लगातार गति करती रहती हैं। जब ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकराती हैं या खिसकती हैं, तो वह क्षेत्र फॉल्ट लाइन के रूप में जाना जाता है। बार-बार टकराव के कारण इन प्लेट्स के किनारे मुड़ जाते हैं, और जब दबाव बहुत अधिक हो जाता है, तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। इस प्रक्रिया में नीचे जमा ऊर्जा बाहर निकलने का रास्ता तलाशती है, जिसके परिणामस्वरूप भूकंप आता है। उत्तराखंड जैसे हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय जोन-4 और जोन-5 में आते हैं, जो अत्यधिक भूकंप संवेदनशील क्षेत्र हैं। यही कारण है कि यहां भूकंप की घटनाएं बार-बार सामने आती हैं।

भूकंप का केंद्र और तीव्रता क्या है?

भूकंप का केंद्र, जिसे एपीसेंटर कहा जाता है, वह स्थान होता है, जहां टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल से भूगर्भीय ऊर्जा निकलती है। इस स्थान पर भूकंप का प्रभाव सबसे अधिक होता है। जैसे-जैसे कंपन की तरंगें केंद्र से दूर जाती हैं, उनकी तीव्रता कम होती जाती है। हालांकि, अगर भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक है, तो आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में इसका प्रभाव काफी तेज हो सकता है। यह प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि कंपन की दिशा ऊपर की ओर है या फैलाव के रूप में है। ऊपर की ओर कंपन होने पर प्रभावित क्षेत्र सीमित रहता है, जबकि फैलाव होने पर इसका दायरा बढ़ सकता है।

भूकंप से बचाव के उपाय

भूकंप एक प्राकृतिक आपदा है, जिसे रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन सही जानकारी और तैयारी से इसके नुकसान को कम किया जा सकता है।

  1. सुरक्षित स्थान चुनें: भूकंप के दौरान मजबूत मेज के नीचे छिपें या दीवार के सहारे खड़े हों।
  2. खुली जगह में जाएं: अगर संभव हो तो घर से बाहर निकलकर खुले मैदान में जाएं, जहां इमारतें या पेड़ न हों।
  3. आपातकालीन किट तैयार रखें: पानी, भोजन, प्राथमिक चिकित्सा किट, और महत्वपूर्ण दस्तावेज हमेशा तैयार रखें।
  4. इमारतों की मजबूती: भूकंप संवेदनशील क्षेत्रों में इमारतें बनाते समय भूकंप-रोधी तकनीकों का उपयोग करें।
  5. जागरूकता: भूकंप से बचाव के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण और मॉक ड्रिल में भाग लें।

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Manisha Mediaperson

मनीषा हिंदी पत्रकारिेता में 20 वर्षों का गहन अनुभव रखती हैं। हिंदी पत्रकारिेता के विभिन्न संस्थानों के लिए काम करने का अनुभव। खेल, इंटरटेनमेंट और सेलीब्रिटी न्यूज पर गहरी पकड़। Uncut Times के साथ सफर आगे बढ़ा रही हैं। इनसे manisha.media@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।


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