उत्तराखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : दो मतदाता सूची में नाम असंवैधानिक, तो अब चुनाव होंगे या नहीं?

उत्तराखंड पंचायत चुनाव एक बार फिर टले, प्रशासक नियुक्त

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे पंचायत चुनावों के बीच एक अहम कानूनी मुद्दे पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। नैनीताल हाईकोर्ट ने स्थानीय निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होने पर चुनाव लड़ने को पंचायती राज अधिनियम के खिलाफ बताया लेकिन ऐसी प्रत्याशियों के इस चुनाव में भाग लेने पर स्पष्टीकरण देने से इंकार कर दिया।

क्या है पूरा मामला?

हरिद्वार को छोड़कर राज्य के 12 जिलों में पंचायत चुनाव प्रक्रिया जारी है। इसी दौरान सामने आया कि कई प्रत्याशियों के नाम नगर निकाय और ग्राम पंचायत दोनों की मतदाता सूचियों में दर्ज हैं। इस कारण कुछ प्रत्याशियों के नामांकन रद्द हो गए, जबकि कुछ के स्वीकृत कर लिए गए, जिससे भ्रम की स्थिति बन गई। देहरादून निवासी शक्ति सिंह बर्त्वाल द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया कि यह स्थिति पंचायती राज अधिनियम की धारा 9 की उपधारा 6 और 7 का उल्लंघन है और इससे कानून की एकरूपता प्रभावित हो रही है।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

हाईकोर्ट की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति जी. नरेंदर और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि वह इस पर पहले ही आदेश दे चुकी है और अब कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया जाएगा। हालांकि, शुक्रवार के निर्णय में यह भी स्पष्ट किया गया था कि राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा दोहरी सूची वाले प्रत्याशियों को अयोग्य घोषित करने संबंधी निर्देश पंचायती राज अधिनियम के अनुसार उचित है। कोर्ट ने कहा था कि नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, इसलिए वह वर्तमान चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा, लेकिन आदेश की भाषा में इस बात का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।

अलग-अलग व्याख्याएं बनी परेशानी

इस आदेश की याची और सरकार द्वारा अलग-अलग व्याख्या किए जाने से स्थिति और भ्रमित हो गई। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अभिजय नेगी का कहना है कि कोर्ट के आदेश के बाद अब दो मतदाता सूचियों में नाम दर्ज होने वाले प्रत्याशी चुनाव लड़ने के अयोग्य हैं। यदि उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती तो यह न्यायालय की अवमानना मानी जाएगी। वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता संजय भट्ट का कहना है कि अभी आदेश की प्रति आयोग को नहीं मिली है और शनिवार व रविवार की छुट्टियों के चलते कोर्ट से स्टे वेकेट या निर्देश प्राप्त करने हेतु सोमवार को सुनवाई तय की गई है।

भविष्य के लिए प्रभावी होगा आदेश

हाईकोर्ट ने वर्तमान में जारी पंचायत चुनाव प्रक्रिया में कोई हस्तक्षेप नहीं किया है। इसका स्पष्ट अर्थ है कि यह आदेश भविष्य के चुनावों से प्रभावी होगा। राज्य निर्वाचन आयोग अब आदेश की प्रति प्राप्त कर विधिक पहलुओं की समीक्षा करेगा।

क्या है कानूनी विवाद का सार?

  • दो मतदाता सूचियों (नगर निकाय + ग्राम पंचायत) में नाम दर्ज होना विवाद का मूल।
  • पंचायती राज अधिनियम के तहत यह अमान्य है।
  • निर्वाचन आयोग के स्तर पर भिन्न-भिन्न फैसलों ने भ्रम पैदा किया।
  • कोर्ट का आदेश – अभी के चुनावों पर असर नहीं, भविष्य में लागू होगा।
Manisha Mediaperson

मनीषा हिंदी पत्रकारिेता में 20 वर्षों का गहन अनुभव रखती हैं। हिंदी पत्रकारिेता के विभिन्न संस्थानों के लिए काम करने का अनुभव। खेल, इंटरटेनमेंट और सेलीब्रिटी न्यूज पर गहरी पकड़। Uncut Times के साथ सफर आगे बढ़ा रही हैं। इनसे manisha.media@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।


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