देहरादून। उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक और लोक विरासत को अब केवल स्कूली छात्र नहीं, बल्कि आमजन भी गहराई से जान सकेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने बड़ी पहल करते हुए स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल ‘हमारी विरासत व विभूतियां’ पुस्तक को सार्वजनिक स्थलों पर उपलब्ध कराने की योजना बनाई है।
यह पुस्तक वर्तमान में प्रदेश की कक्षा 6, 7 और 8 के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम का हिस्सा है, जिसमें ग्वेल देवता के न्याय, श्रीनंदा राजजात यात्रा, पंडित नैन सिंह रावत, वीरांगना तीलू रौतेली, पंचकेदार, कत्यूर वंश की रानियां, उत्तराखंड राज्य आंदोलन, गढ़वाल राइफल्स की शौर्यगाथाएं, रम्माण उत्सव जैसे पौराणिक, ऐतिहासिक और लोक सांस्कृतिक पहलुओं को विस्तार से समाहित किया गया है।
अब हर गांव, पुस्तकालय और पंचायत भवन में मिलेगी यह किताब
राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) द्वारा तैयार की गई इस पुस्तक को अब पुस्तकालयों, ग्राम पंचायत भवनों, सामुदायिक केंद्रों और पुस्तक विक्रेताओं की दुकानों पर उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए परिषद की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा जा रहा है। SCERT के पीठासीन अधिकारी सुनील कुमार भट्ट ने बताया कि शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत को इस प्रस्ताव से अवगत कराया गया है ताकि इसे शीघ्र लागू किया जा सके।
क्या है इस पुस्तक का उद्देश्य?
इस पुस्तक का प्रमुख उद्देश्य है नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना। उत्तराखंड की महान विभूतियों, स्वतंत्रता सेनानियों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और पर्यावरणविदों के योगदान को आम लोगों को पहुंचाने के साथ राज्य के मेलों, त्योहारों और पारंपरिक विरासतों को पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। उत्तराखंड की स्थानीय संस्कृति, इतिहास और वीरता की गाथाओं को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने के उद्देश्य से कक्षा 6 से 8 तक की पुस्तकों को विशेष रूप से तैयार किया गया है।
तीनों कक्षाओं की पुस्तकों में क्या है खास?
अभी ये किताबें इस समय केवल स्कूली पाठ्यक्रम तक सीमित हैं, लेकिन साहित्य प्रेमी, शोधकर्ता और उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत में रुचि रखने वाले लोग अब इन्हें आम उपयोग में लाने की मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों के मद्देनज़र SCERT द्वारा शासन को प्रस्ताव भेजा गया है ताकि इन पुस्तकों को बाजार में या सार्वजनिक स्थलों पर उपलब्ध कराया जा सके।


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