अल्मोड़ा। राष्ट्रीय राजमार्ग NH-109 पर अल्मोड़ा–हल्द्वानी रोड के क्वारब पुल के पास भू-स्खलन और लगातार मलबा गिरने के कारण यह मार्ग जान-माल की दृष्टि से संवेदनशील बन गया है। यह क्षेत्र भू-धसाव जोन बन गया है, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने भारी मालवाहक वाहनों के लिए 29 जून 2025 से अग्रिम आदेश तक एक ट्रैफिक डायवर्जन योजना लागू कर दी है।
क्यों जरूरी हुआ डायवर्जन?
एनएच-109 पर क्वारब पुल के निकट लगातार चट्टानों व बोल्डरों के गिरने की घटनाएं हो रही हैं, जिससे न केवल यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि वाहन चालकों और आम यात्रियों की जान को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। विशेष रूप से भारी मालवाहक वाहनों के कारण सड़क पर दबाव अधिक हो रहा था। इस स्थिति को नियंत्रित करने और निर्बाध यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह डायवर्जन प्लान जारी किया गया है।
NH-109 ट्रैफिक डायवर्जन प्लान: भारी वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग
1. बागेश्वर, कौसानी, सोमेश्वर से हल्द्वानी जाने वाले भारी मालवाहक वाहन:
→ कोसी से मचखाली होकर रानीखेत के रास्ते हल्द्वानी को भेजे जाएंगे।
2. पिथौरागढ़, धौलछीना, दन्या से हल्द्वानी जाने वाले भारी मालवाहक वाहन:
→ बाड़ेछीना – दन्या – सुवाखान – लमगड़ा होकर शहरफाटक के रास्ते हल्द्वानी को जाएंगे।
3. अल्मोड़ा से हल्द्वानी को जाने वाले भारी मालवाहक वाहन:
→ बेस तिराहा – पाण्डेखोला – कोसी होते हुए रानीखेत मार्ग अथवा
→ सिकुड़ाबैंड – लमगड़ा – शहरफाटक मार्ग से हल्द्वानी को भेजे जाएंगे।
स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश
यातायात पुलिस और जिला प्रशासन ने सभी वाहन चालकों, ट्रांसपोर्ट यूनियनों और नागरिकों से अपील की है कि वे इन नव निर्धारित वैकल्पिक मार्गों का पालन करें ताकि किसी भी दुर्घटना या जाम की स्थिति से बचा जा सके। साथ ही सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना सभी की जिम्मेदारी है। जिला मजिस्ट्रेट अलोक कुमार पांडे ने बताया कि क्वारब की पहाड़ी की अस्थिरता के कारण रात के समय यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा, भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण दल (Geological Survey of India) इस क्षेत्र का निरीक्षण कर रहा है ताकि भूस्खलन के कारणों का स्थायी समाधान ढूंढा जा सके।
अल्मोड़ा-हल्द्वानी रोड पर चुनौतियां बढ़ीं
क्वारब क्षेत्र में भूस्खलन की समस्या पिछले कई महीनों से बनी हुई है। सितंबर 2024 से शुरू हुई इस समस्या ने अल्मोड़ा, बागेश्वर, और पिथौरागढ़ जैसे जिलों को जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण राजमार्ग को बार-बार प्रभावित किया है। भारी बारिश और पहाड़ी की अस्थिरता के कारण सड़क का एक हिस्सा सुयाल नदी में धंस गया है, जिससे यह मार्ग और भी खतरनाक हो गया है। इसके परिणामस्वरूप यात्रियों को जाम में फंसना पड़ रहा है। पर्यटन सीजन में अल्मोड़ा, नैनीताल, और हल्द्वानी जैसे क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।


शंकर दत्त पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले चार दशक से मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। Uncut Times के साथ वरिष्ठ सहयोगी के रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड की पत्रकारिता में जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया है। कुमाऊं के इतिहास की अच्छी जानकारी रखते हैं। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक और शोधपरक लेख प्रकाशित। लिखने-पढ़ने और घूमने में रुचि। इनसे SDPandey@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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