मां नंदा-सुनंदा के डोले की शोभायात्रा में उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से विदाई

अल्मोड़ा। मां नंदा-सुनंदा के डोले की भव्य शोभायात्रा सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के बीच निकाली गई। शहर में जैसे ही मां के डोले निकले, पूरा नगर भक्तिमय हो उठा। हर तरफ से जयकारों की गूंज सुनाई दी। नम आंखों से श्रद्धालुओं ने मां नंदा-सुनंदा को विदाई दी।

नंदादेवी मंदिर से हुई शोभायात्रा की शुरुआत

प्रसिद्ध नंदादेवी मंदिर परिसर से मां नंदा-सुनंदा के डोले की शोभायात्रा निकली। इससे पहले मंदिर में मां की विशेष आरती हुई। शाम 04:47 बजे शंखध्वनि और घंटानाद के बीच डोले को मंदिर परिक्रमा कराई गई और फिर यात्रा का शुभारंभ हुआ।

नगरभर में उमड़े श्रद्धालु

मां नंदा-सुनंदा की यह शोभायात्रा केवल धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति का भी प्रतीक मानी जाती है। डोले की यह शोभायात्रा बसंल गली, शिखर तिराहा, माल रोड, लोहे शेर, कचहरी बाजार, थाना बाजार, पलटन बाजार और सिद्धनौला से होती हुई कैंट क्षेत्र पहुंची। हर जगह श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। लोग मां नंदा-सुनंदा के जयकारे लगाते हुए यात्रा में सम्मिलित रहे।

जगह-जगह पुष्प वर्षा

लगातार बारिश के कारण श्रद्धालु मौसम को लेकर चिंतित थे, लेकिन सोमवार को बारिश थमने के बाद बड़ी संख्या में भक्त शोभायात्रा में शामिल हुए।
नगर की छतों और बालकनियों से लोगों ने मां के दर्शन किए। महिलाएं घरों से निकलकर जगह-जगह पुष्प वर्षा और अक्षत अर्पित कर मां नंदा-सुनंदा को भावभीनी विदाई देती रहीं। शोभायात्रा के दौरान महिलाएं मांगलिक गीत गाती हुई चलीं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

दुगालखोला में विसर्जन

परंपरा के अनुसार शोभायात्रा का अंतिम पड़ाव दुगालखोला रहा, जहां मां नंदा-सुनंदा की मूर्तियों का विधि-विधान से विसर्जन किया गया। स्थानीय मान्यता है कि भगवती मंदिर मां नंदा-सुनंदा का मायका है, इसलिए यहां से भी भक्त बड़ी संख्या में विदाई देने के लिए उमड़े। नंदा-सुनंदा मेले के इस अंतिम दिन पूरा नगर भावुक हो उठा। जहां एक ओर जयकारों और गीतों से वातावरण गूंज उठा, वहीं दूसरी ओर विदाई के क्षण में भक्तों की आंखें नम हो गईं।

SD Pandey

शंकर दत्त पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले चार दशक से मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। Uncut Times के साथ वरिष्ठ सहयोगी के रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड की पत्रकारिता में जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया है। कुमाऊं के इतिहास की अच्छी जानकारी रखते हैं। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक और शोधपरक लेख प्रकाशित। लिखने-पढ़ने और घूमने में रुचि। इनसे SDPandey@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।


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