रामनगर : कारगिल युद्ध में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों की स्मृति में आज उत्तराखंड के रामनगर में एम.पी. हिन्दू इंटर कॉलेज में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के कैडेट्स और शिक्षकों ने मिलकर शहीदों को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया। 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कारगिल में ऐतिहासिक जीत हासिल की थी, और यह दिन हर साल वीर सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है।
शहीदों के नाम दीप प्रज्वलन
विद्यालय के मीडिया प्रभारी हेम चंद्र पांडे ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्य संजीव शर्मा द्वारा कारगिल शहीदों के सम्मान में दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस भावनात्मक क्षण ने समारोह को एक गंभीर और सम्मानजनक शुरुआत दी। इसके बाद, विद्यालय के एनसीसी अधिकारी चंद्र शेखर मिश्र, जफर अली और अन्य शिक्षकों ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर सभी ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले वीर सैनिकों के बलिदान को याद किया और उनकी वीरता को सलाम किया।
कैडेट्स ने दी प्रेरणादायक प्रस्तुति
कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट अंडर ऑफिसर शौर्य अनंत सिंह ने कारगिल विजय दिवस के महत्व और इसके ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की वीरता और साहस की कहानियां साझा कीं। अपने संबोधन के अंत में, शौर्य ने स्वर्गीय कैप्टन विक्रम बत्रा के प्रसिद्ध कथन को उद्धृत किया, जो हर भारतीय के दिल में गूंजता है: “या तो मैं तिरंगा फहराकर लौटूंगा, या उसमें लिपटा रहूंगा, लेकिन मैं जरूर लौटूंगा।” इस कथन ने उपस्थित सभी लोगों में देशभक्ति की भावना को और प्रज्वलित किया।
वहीं, छात्रा तनुजा जोशी ने शहीदों के सम्मान में एक भावपूर्ण गायन प्रस्तुति दी, जिसने समारोह में उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया। उनकी मधुर आवाज और देशभक्ति से भरे गीत ने शहीदों के प्रति श्रद्धा और सम्मान को और गहरा किया।
शहीदों की स्मृति में वृक्षारोपण
कार्यक्रम का एक विशेष हिस्सा रहा शहीदों की स्मृति में आयोजित वृक्षारोपण। विद्यालय की शिक्षिकाओं नीलम सुंदरियाल, नेहा गुप्ता और मोनिका ने इस पहल का नेतृत्व किया। वृक्षारोपण न केवल शहीदों के प्रति सम्मान का प्रतीक था, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति विद्यालय की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। इस गतिविधि ने यह संदेश दिया कि शहीदों की स्मृति को जीवित रखने का एक तरीका यह भी है कि हम अपने पर्यावरण की रक्षा करें और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक हरा-भरा भविष्य सुनिश्चित करें।
दो मिनट का मौन: शहीदों को श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के अंत में शहीदों के सम्मान में दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने शहीदों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। यह क्षण न केवल भावनात्मक था, बल्कि यह सभी के लिए एक गहन चिंतन का अवसर भी था कि देश की रक्षा के लिए कितने वीर सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी। कार्यक्रम में विद्यालय के कई शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी की। इनमें मेवालाल, राजीव शर्मा, चेतन स्वरूप, शिवेंद्र विक्रम, डॉ. प्रभाकर पांडे, चारु तिवारी, के.सी. त्रिपाठी, सर्वेश मलिक, दिव्या पाठक, सरला मर्तोलिया, अंकना शाह और हरीश बिष्ट शामिल थे। इन सभी ने अपने योगदान से इस समारोह को यादगार बनाया और शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कारगिल विजय दिवस का महत्व
कारगिल विजय दिवस हर साल 26 जुलाई को मनाया जाता है, जो 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की जीत का प्रतीक है। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में दुश्मन के कब्जे वाले ऊंचे पहाड़ी इलाकों को मुक्त कराया था। इस युद्ध में कैप्टन विक्रम बत्रा, लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, राइफलमैन संजय कुमार और कई अन्य वीर सैनिकों ने अपनी शहादत दी थी। यह दिन न केवल उनकी वीरता को याद करने का अवसर है, बल्कि यह युवा पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान की भावना से प्रेरित करने का भी मौका है।


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