चंपावत (उत्तराखंड) : देवभूमि उत्तराखंड में एक हाई-प्रोफाइल ड्रग्स नेटवर्क चल रहा था, जिसकी जड़ें मुंबई तक हैं। एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई के बाद गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, जो भारत-नेपाल सीमा पर एमडी जैसी घातक ड्रग्स तैयार कर उसे मुंबई तक सप्लाई कर रहा था। चंपावत जिले के बनबसा क्षेत्र में पुलिस ने एक 22 वर्षीय स्थानीय महिला को 5.688 किलो मेथामफेटामाइन (एमडी) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस जब्त ड्रग्स की कीमत 10 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की भी संभावना जताई जा रही है।
2 करोड़ प्रति किलो वाली क्या है एमडी ड्रग्स?
मेथामफेटामाइन, जिसे आम भाषा में एमडी’ कहा जाता है, एक खतरनाक सिंथेटिक नशा है जो तेज़ी से युवाओं को नशे की गिरफ्त में लेता है। यह ड्रग्स अत्यधिक नशे की लत पैदा करता है और इसका सेवन करने वाले पर मानसिक व शारीरिक रूप से बुरा असर पड़ता है। भारत में इस पर कड़ा नियंत्रण रखने के लिए एनडीपीएस (NDPS) अधिनियम लागू है।
ठाणे से शुरू हुआ था खुलासा
यह कार्रवाई उस समय सामने आई जब महाराष्ट्र की ठाणे पुलिस को पिथौरागढ़ से मुंबई तक चल रहे ड्रग्स तस्करी नेटवर्क का पता चला। इस इनपुट के आधार पर, 27 जून को पिथौरागढ़ के थल क्षेत्र में स्थित एक पोल्ट्री फार्म में चल रही अवैध लैब को ध्वस्त किया गया, जहाँ यह ड्रग्स तैयार की जा रही थी। इसके बाद से उत्तराखंड पुलिस और एसओजी लगातार अलर्ट पर थी। शनिवार सुबह बनबसा में शारदा नहर के पास चेकिंग के दौरान पुलिस को ईशा नाम की महिला के बैग से यह भारी मात्रा में ड्रग्स मिली। एक दिन बाद गिरोह के मास्टरमाइंड कुनाल कोहली को पुलिस ने नानकमत्ता से गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसके पास से 126 लीटर कैमिकल, 28 किलो पाउडर और 7.41 ग्राम तैयार MDMA बरामद किया। बरामद सामग्री से लगभग 12 करोड़ रुपये मूल्य की ड्रग्स तैयार की जा सकती थी।
आरोपियों की तलाश जारी
जांच में सामने आया कि यह गिरोह पहले बनारस में ड्रग्स बनाता था, और अब पिथौरागढ़ में सक्रिय था। ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाला कैमिकल गाजियाबाद से मंगाया गया। पुलिस पूछताछ में महिला ने कबूला कि यह खेप उसे उसके पति राहुल कुमार और उसके साथी कुनाल कोहली ने 27 जून को पिथौरागढ़ से दी थी। पुलिस को संदेह है कि महिला ड्रग्स को नष्ट करने के लिए नहर की ओर जा रही थी, ताकि पुलिस की नजर में न आए। गिरोह की जड़ें नेपाल, बनारस, गाजियाबाद और मुंबई तक फैली हैं।
पुलिस टीम को सम्मान, जांच जारी
पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने जानकारी दी कि मामला एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। वहीं, कुमाऊं रेंज की आईजी रिद्धिम अग्रवाल ने पूरी पुलिस टीम को ₹20,000 का पुरस्कार देने की घोषणा की है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है — कैसे यह सिंथेटिक ड्रग थल जैसी ग्रामीण जगहों से तैयार होकर मुंबई जैसे महानगरों तक पहुंचाई जा रही थी। अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क से जुड़े लिंक की भी जांच हो रही है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत-नेपाल सीमा से सटा हुआ है।


मनीषा हिंदी पत्रकारिेता में 20 वर्षों का गहन अनुभव रखती हैं। हिंदी पत्रकारिेता के विभिन्न संस्थानों के लिए काम करने का अनुभव। खेल, इंटरटेनमेंट और सेलीब्रिटी न्यूज पर गहरी पकड़। Uncut Times के साथ सफर आगे बढ़ा रही हैं। इनसे manisha.media@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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