नई दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में मंगलवार सुबह एक बार फिर भूकंप के झटके महसूस किए गए। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, यह भूकंप सुबह 6:00 बजे के आसपास आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई। भूकंप का केंद्र हरियाणा के फरीदाबाद में जमीन की सतह से 5 किलोमीटर की गहराई पर था, जिसके निर्देशांक 28.29 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 72.21 डिग्री पूर्वी देशांतर पर दर्ज किए गए। भूकंप के झटके महसूस होते ही दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में लोग दहशत में अपने घरों से बाहर निकल आए। सौभाग्यवश, इस भूकंप से किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है।
हाल के दिनों में बार-बार झटके
दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में हाल के दिनों में भूकंप के झटके बार-बार महसूस किए जा रहे हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ रही है। इससे पहले, 10 जुलाई 2025 को हरियाणा के झज्जर में 4.4 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका असर दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, और फरीदाबाद तक महसूस हुआ था। इसके अलावा, 11 जुलाई को झज्जर में 3.7 तीव्रता और 17 जुलाई को रोहतक में 3.3 तीव्रता का भूकंप आया था। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, 10 जुलाई से अब तक रोहतक और झज्जर के 40 किलोमीटर के दायरे में 2.5 से अधिक तीव्रता के चार भूकंप दर्ज हो चुके हैं।
भूकंप का केंद्र और प्रभाव
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने बताया कि मंगलवार सुबह आए भूकंप का केंद्र फरीदाबाद में था, और यह हल्के स्तर का भूकंप था। इसकी गहराई केवल 5 किलोमीटर होने के कारण ऊंची इमारतों की ऊपरी मंजिलों पर झटके अधिक स्पष्ट रूप से महसूस किए गए। दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, और गाजियाबाद जैसे एनसीआर क्षेत्रों में भी कंपन महसूस हुआ, लेकिन इसकी तीव्रता कम होने के कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। स्थानीय लोगों ने बताया कि भूकंप के दौरान हल्की गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी, जिससे कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया।
लोगों में दहशत और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं
भूकंप के झटके महसूस होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के निवासियों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल रहा। सोशल मीडिया पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक यूजर ने लिखा, “दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के झटके महसूस हुए, लेकिन मुझे कुछ पता नहीं चला।” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “लोग बाहर निकलकर भागे, लेकिन बारिश के कारण रोड पर पानी था। दिल्ली वाले करें तो क्या करें?”
दिल्ली-एनसीआर में भूकंप का खतरा
दिल्ली-एनसीआर सिस्मिक जोन-IV में आता है, जो मध्यम से उच्च जोखिम वाला भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है। इस क्षेत्र में दिल्ली-मुरादाबाद फॉल्ट लाइन, मथुरा फॉल्ट लाइन, और सोहना फॉल्ट लाइन मौजूद हैं, जो भूकंप के लिए संवेदनशील हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस क्षेत्र में बार-बार आने वाले हल्के भूकंप भविष्य में किसी बड़े भूकंप की संभावना का संकेत हो सकते हैं। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि दिल्ली-एनसीआर में 6.5 तीव्रता तक का भूकंप संभावित है, जिसके लिए यमुना बैंक, पीतमपुरा, उत्तम नगर, नरेला, और पंजाबी बाग जैसे क्षेत्र विशेष रूप से संवेदनशील हैं।
हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में भूकंप की घटनाएं बढ़ी हैं। उदाहरण के लिए, 17 फरवरी 2025 को दिल्ली के धौला कुआं के पास 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था, और 29 मई 2025 को 4.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। हालांकि, इनमें से अधिकांश भूकंपों की तीव्रता 5 से कम रही, जिसके कारण कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ। फिर भी, विशेषज्ञों का कहना है कि इन हल्के झटकों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए, क्योंकि ये टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल का संकेत हैं।
भूकंप के कारण
भूकंप का मुख्य कारण पृथ्वी की सतह के नीचे मौजूद टेक्टोनिक प्लेट्स की हलचल है। पृथ्वी सात प्रमुख टेक्टोनिक प्लेट्स से बनी है, और जब ये प्लेटें एक-दूसरे से टकराती हैं या फॉल्ट लाइनों पर खिसकती हैं, तो इससे उत्पन्न ऊर्जा भूकंप के रूप में बाहर निकलती है। दिल्ली-एनसीआर के पास अरावली पर्वत श्रृंखला और हिमालय क्षेत्र की टेक्टोनिक गतिविधियां इस क्षेत्र को भूकंप के लिए संवेदनशील बनाती हैं।
दिल्ली-एनसीआर भी संवदेनशील
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली-एनसीआर की घनी आबादी और ऊंची इमारतें इसे भूकंप के प्रति और अधिक संवेदनशील बनाती हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग द्वारा तैयार की गई ‘Liquefaction Vulnerability Map’ के अनुसार, यमुना बैंक, पीतमपुरा, उत्तम नगर, नरेला, और पंजाबी बाग जैसे क्षेत्र 6.5 तीव्रता के भूकंप के लिए विशेष रूप से जोखिम में हैं।
वाडिया इंस्टीट्यूट के भूकंप वैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार ने बताया कि छोटे भूकंप धरती के अंदर संचित ऊर्जा का संकेत देते हैं, लेकिन यह धारणा गलत है कि छोटे भूकंप बड़े भूकंप को रोक सकते हैं। इसलिए, प्रशासन और नागरिकों को भूकंप के लिए पहले से तैयार रहना होगा। भूकंपरोधी इमारतों का निर्माण, आपातकालीन योजनाएं, और जन जागरूकता अभियान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।


मनीषा हिंदी पत्रकारिेता में 20 वर्षों का गहन अनुभव रखती हैं। हिंदी पत्रकारिेता के विभिन्न संस्थानों के लिए काम करने का अनुभव। खेल, इंटरटेनमेंट और सेलीब्रिटी न्यूज पर गहरी पकड़। Uncut Times के साथ सफर आगे बढ़ा रही हैं। इनसे manisha.media@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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