Latest News (सुभाष भट्ट) : धर्मांतरण गिरोह से जुड़ा एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। घर से लापता हुईं दो सगी बहनों को पुलिस ने कोलकाता से सकुशल बरामद किया है। जांच में सामने आया है कि ये बहनें एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क के संपर्क में थीं, जो उन्हें आयशा और अलीशा की तरह तैयार कर रहा था—यानी खुद धर्म बदलकर अन्य युवतियों को फुसलाने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने का प्रशिक्षण।
कैसे फंसीं दोनों बहनें गिरोह के जाल में?
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, ये दोनों बहनें पूरा दिन ज़ाकिर नाइक और अन्य इस्लामी धर्मांतरण से जुड़े वीडियो देखती थीं। उन्हें गिरोह के सदस्यों द्वारा लगातार ऑनलाइन साहित्य और वीडियो भेजे जा रहे थे। बहनों ने घर छोड़ने के बाद यूपी से दिल्ली, बिहार होते हुए पश्चिम बंगाल की यात्रा की। दिल्ली में उन्हें एक कथित धर्मांतरण कार्यालय में प्रवेश नहीं मिला। इसके बाद बिहार में एक महिला ‘जोया’ ने उन्हें तीन दिन पनाह दी और 10,000 रुपये की आर्थिक मदद दी। पश्चिम बंगाल में ‘रीत बनिक’ नाम की महिला ने उन्हें मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में कमरा दिलवाया, जहां वे दिनभर नमाज़ पढ़तीं और इस्लामी साहित्य पढ़ने में व्यस्त रहती थीं।
धार्मिक कट्टरता की ओर बढ़ते कदम
पुलिस जांच में पता चला कि बहनें खुद भी धर्मांतरण पर लेख लिखने और अन्य युवतियों को प्रभावित करने की दिशा में बढ़ रही थीं। वे विदेश जाकर मस्जिद में नमाज़ पढ़ने की बातें भी कर रही थीं। उनकी गतिविधियां पूरी तरह धर्मांतरण एजेंडे की ओर इशारा कर रही थीं। शुरुआती पूछताछ में दोनों बहनें तभी घर लौटने को तैयार हुईं जब गिरफ्तार आरोपियों को छोड़ा जाए—यह दर्शाता है कि वे मानसिक रूप से कितनी गहराई तक प्रभावित हो चुकी थीं। उन्हें समझाने में पुलिस को काफी वक्त लगा। आखिरकार, परिवार से मिलवाने के बाद ही वे खुलकर बयान देने को तैयार हुईं।
दस से ज्यादा गिरफ्तारियां
इस मामले में अभी तक 10 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जिनमें गोवा निवासी ‘आयशा उर्फ एसबी कृष्णा’ भी शामिल है। गिरोह का मास्टरमाइंड अब्दुल रहमान उर्फ महेंद्र पाल है, जो मूल रूप से फिरोजाबाद का निवासी है और फिलहाल दिल्ली के मुस्तफाबाद में रह रहा है। अब्दुल रहमान के दो बेटे—अब्दुल्ला और अब्दुल रहीम, तथा जुनैद (जिस पर दलित युवती से जबरन निकाह का आरोप है) को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। आरोपियों के पास से फर्जी दस्तावेज, संदिग्ध इस्लामी साहित्य, मोबाइल डेटा में कई संदिग्ध वीडियो और चैट्स, नकली पहचान पत्र और धर्मांतरण संबंधित संपर्कों की सूची मिली है।
बड़ा सवाल: समाज कब होगा सजग?
यह मामला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी सामाजिक चेतावनी है। धर्मांतरण के ऐसे गिरोह सोशल मीडिया, धार्मिक वीडियो, साहित्य और आर्थिक लालच के ज़रिए भोले-भाले युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे हैं। जरूरत है कि अभिभावक अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। धार्मिक कट्टरता फैलाने वाली सामग्रियों की रिपोर्ट करें। स्कूल-कॉलेजों में साइबर जागरूकता अभियान चलाए जाएं। समाज और प्रशासन मिलकर सतर्क निगरानी रखें।


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