देहरादून : सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति के तहत विजिलेंस को भ्रष्टाचार पर वार करने के लिए खुली छूट दे दी है। स्वतंत्र कार्रवाई की अनुमति का ही नतीजा है कि वर्ष 2021 की तुलना में 2024 में गिरफ्तारियों की संख्या लगभग 7 गुना बढ़ गई है। राज्य में अब तक कई उच्च पदों पर बैठे अधिकारी भी विजिलेंस के जाल में फंसे हैं।
2020 से अब तक 94 गिरफ्तारियां, 82 ट्रैप
विजिलेंस विभाग ने बीते साढ़े चार सालों में 125 शिकायतें प्राप्त कीं। इस अवधि में 82 ट्रैप ऑपरेशन किए। कुल 94 लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया, जिसमें 13 राजपत्रित अधिकारी भी शामिल हैं। 71% मामलों में सजा दिलाने में कामयाबी मिली है।
दोषी को नहीं मिलेगी अहम जिम्मेदारी
सीएम धामी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जब तक जांच पूरी न हो जाए, आरोपी को कोई भी महत्वपूर्ण पद या दायित्व न दिया जाए। ट्रैप मामलों में अभियोजन प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
“राज्य में भ्रष्टाचार को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विजिलेंस को पूरी स्वतंत्रता दी गई है। राज्य को साफ-सुथरी प्रशासनिक व्यवस्था देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं।”
– सीएम पुष्कर सिंह धामी
वर्ष दर वर्ष कार्रवाई के आंकड़े
वर्ष | गिरफ्तारियाँ | निर्णय | सजा |
---|---|---|---|
2021 | 07 | 02 | 02 |
2022 | 15 | 03 | 01 |
2023 | 20 | 18 | 16 |
2024 | 38 | 13 | 07 |
बड़े भ्रष्ट अधिकारियों पर भी गिरी गाज
नीचे कुछ चर्चित मामलों की सूची दी गई है, जिनमें विजिलेंस ने प्रभावी कार्रवाई की:
1️⃣ लोक निर्माण विभाग का एई (नैनीताल) : ठेकेदार से ₹10,000 रिश्वत मांगने के आरोप में रंगे हाथ गिरफ्तार।
2️⃣ यूपीसीएल जेई (देहरादून) : हरबर्टपुर सब स्टेशन में ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया।
3️⃣ एलआईयू कर्मी (रामनगर) : एलआईयू उपनिरीक्षक और मुख्य आरक्षी दोनों को एक साथ रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया।
4️⃣ रोडवेज एजीएम (काशीपुर) : अनुबंधित बस संचालन की एवज में ₹90,000 रिश्वत लेते पकड़ा गया।
टोल फ्री हेल्पलाइन 1064
उत्तराखंड विजिलेंस की कार्यशैली में स्पष्ट बदलाव आया है। अब सिर्फ दिखावटी कार्रवाइयों के बजाय ठोस प्रमाण, न्यायिक प्रक्रिया और सजा सुनिश्चित करने की दिशा में सरकार का रुख सख्त है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विजिलेंस विभाग ने भ्रष्टाचार की शिकायतों के लिए टोल फ्री नंबर 1064 जारी किया है। इसके माध्यम से कोई भी नागरिक भ्रष्टाचार की सूचना गोपनीय रूप से दे सकता है।
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शंकर दत्त पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले चार दशक से मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। Uncut Times के साथ वरिष्ठ सहयोगी के रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड की पत्रकारिता में जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया है। कुमाऊं के इतिहास की अच्छी जानकारी रखते हैं। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक और शोधपरक लेख प्रकाशित। लिखने-पढ़ने और घूमने में रुचि। इनसे SDPandey@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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