Uttarakhand News : उत्तराखंड की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बने मां नंदा-सुनंदा मेले को इस वर्ष पूरी पारंपरिक भव्यता और धार्मिक गरिमा के साथ आयोजित करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि लोक आस्था, संस्कृति और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसे हजारों श्रद्धालु और पर्यटक हर साल श्रद्धा से मनाते हैं।
मेले की तैयारियां हुईं शुरू
श्री नंदा देवी मंदिर समिति ने मेले की औपचारिक तैयारियों का शुभारंभ कर दिया है। अल्मोड़ा में समिति के सदस्यों ने मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं के निर्माण हेतु आवश्यक केले के पवित्र खामों (कदली वृक्षों) के चयन के लिए दुलागांव रैलाकोट क्षेत्र का विशेष दौरा किया। इस मौके पर व्यवस्थापक अनूप साह, पार्षद अर्जुन बिष्ट, अमित साह मोनू, अभिषेक जोशी, ग्राम पंचायत सदस्य कपिल मल्होत्रा समेत कई अन्य सदस्य मौजूद रहे। परंपरा के अनुसार, इन पूजा योग्य वृक्षों का चयन ग्रामीणों की उपस्थिति में विधिपूर्वक किया गया। इस प्रक्रिया में धीरेन्द्र सिंह रावत, हेमेंद्र सिंह रावत, कल्याण सिंह रावत, गोपाल सिंह, और धन सिंह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों ने भी भाग लिया।
नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं में कदली वृक्षों का महत्व
मंदिर समिति के अनुसार, मां नंदा और सुनंदा की प्रतिमाएं हर साल पवित्र कदली वृक्षों (केले के खंभों) से बनाई जाती हैं। यह परंपरा नंदा राजजात यात्रा से जुड़ी हुई है और इसे अत्यंत पुण्य कार्य माना जाता है। ग्रामीणों के सहयोग से इन वृक्षों का चयन कर विधिविधान से मंदिर तक लाया जाता है। अनूप साह ने बताया कि इस वर्ष मेला पूर्व वर्षों की तुलना में अधिक भव्यता और श्रद्धा के साथ आयोजित होगा। श्रद्धालुओं के लिए विशेष सुविधाएं जैसे व्यवस्थित बैठने की व्यवस्था, प्रसाद वितरण केंद्र, धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला की योजना बनाई जा रही है।
प्रतिमा निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा
अगले कुछ दिनों में मां नंदा-सुनंदा की प्रतिमाओं का निर्माण कार्य भी पारंपरिक विधियों के अनुसार शुरू कर दिया जाएगा। पूरे क्षेत्र में अभी से धार्मिक उत्साह और संस्कृति के रंग छाने लगे हैं।


शंकर दत्त पांडेय वरिष्ठ पत्रकार हैं और पिछले चार दशक से मीडिया की दुनिया में सक्रिय हैं। Uncut Times के साथ वरिष्ठ सहयोगी के रूप से जुड़े हैं। उत्तराखंड की पत्रकारिता में जीवन का बड़ा हिस्सा बिताया है। कुमाऊं के इतिहास की अच्छी जानकारी रखते हैं। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं में समसामयिक और शोधपरक लेख प्रकाशित। लिखने-पढ़ने और घूमने में रुचि। इनसे SDPandey@uncuttimes.com पर संपर्क कर सकते हैं।
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